बड़ी बहन ने मुझे सेक्स का पाठ पढ़ाया

बहन की चुदाई कोई अच्छी बात नहीं है.
पर जब कोई आदमी नया-नया जवान होता है तो उसका चोदने का मन होता ही है।
कोई-कोई तो अपनी इच्छा दबा लेता है.
पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी इस इच्छा को दबा नहीं पाते।

ऐसे में उन्हें सिर्फ चूत दिखाई देती है, वह किसी की भी हो।
उन्हें न मां दिखाई देती है, न बहन और न मौसी-काकी।

उन्हीं लोगों में एक मैं भी था।
वैसे बहन को मैंने अपनी इच्छा से नहीं चोदा था; उसने खुद चोदवाया था।
और इसकी शुरुआत भी बहुत पहले हो गई थी।

वैसे मुझे अपना नाम बताने की जरूरत नहीं है। नाम जान कर आप लोग करेंगे ही क्या!
आपको तो मजेदार कहानी चाहिए जिसे मैं अब Xxx सिस पोर्न कहानी लिख रहा हूं।

उस मुझे चुदाई के बारे में किसी को ज्यादा पता नहीं था, इस बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी।
बस इतना जानता था कि आदमी के पास लंड होता है और औरत के पास चूत, जिसे आदमी लंड से चोदता है।

कैसे चोदता है, यह भी नहीं पता था।
हां, इतना जरूर पता था कि लंड को चूत में घुसेड़ा जाता है।
कहां और कैसे, यह जानकरी नहीं थी।

चूत में लंड घुसेड़ कर कैसे चोदा जाता है, यह भी नहीं जानता था।
चूत कभी देखी ही नहीं थी, तो कैसे जानता।

यह संयोग ही था कि चूत मिली भी तो आसानी से और घर में ही मिल गई।

शायद मैं भाग्यशाली लोगों में था जो बिना मेहनत किए घर बैठे बहन की मस्त कुंवारी चूत मिल गई थी।

एक दिन शाम को मैं और बहन बाहर वाले कमरे में बैठे पढ़ रहे थे।
दादाजी खेत में पानी देखने चले गए थे।
मां अंदर घर में खाना बना रही थी।

पिताजी शहर में रह कर नौकरी करते थे।
वे शनिवार की शाम को आते थे और सोमवार की सुबह चले जाते थे।

इस तरह घर में मैं, बहन, मां और दादाजी ही रहते थे।

उस दिन शाम को पढ़ते हुए मुझे लगा मेरे पेल्हर में कोई कीड़ा काट रहा है।
मैंने खुजलाया, पर खुजलाने का कोई असर नहीं हुआ।

मुझे बार बार पेल्हर खुजलाते देख बहन ने कहा- क्या हो गया है तुझे, जो बारबार चड्डी के अंदर हाथ डाल कर खुजला रहा है?
“ऐसा लगता है कोई कीड़ा काट रहा है। पर खुजली करने से भी नहीं मान रहा।” मैंने कहा।

“कीड़ा नहीं, किलनी लगी होगी। वही काट रही होगी। वह खुजलाने से नहीं मानेगी। जब तक उसे निकालोगे नहीं, वह इसी तरह काटती रहेगी। उसे खींच कर निकालो, तभी वह निकलेगी।” बहन ने कहा।

मैंने दूसरी ओर मुख करके हाफ पैंट के अंदर झांका।
पर वह दिखाई नहीं दी।

दिखाई दे भी कैसे?
वह होती है गहरे खून के रंग की।
पेल्हर के रंग की होने की वजह से उसमें वह इस तरह छुप जाती है कि जल्दी दिखाई नहीं देती।

मैंने बहुत कोशिश की पर वह दिखाई नहीं दी।
जब दिखाई ही नहीं दे रही थी तो निकालता कैसे?

मैं डर गया और रोने लगा।
बहन ने कहा- लाओ मैं निकाल देती हूं, इसने रोने की कौन सी बात है।

“वहां से कैसे निकालोगी?”
“कहां लगी है, जो मैं नहीं निकाल सकती?” बहन ने डांटते हुए कहा।

बहन मुझसे 2 साल बड़ी थी।
मैं शर्मा रहा था।

उसकी तरफ मुंह करके मैं खड़ा हो गया तो उसने हाथ में टार्च लेकर पैंट की मोहरी उठा कर पेल्हर पर टॉर्च मारी।
पर पैंट टाइट थी इसलिए उसे वह जगह दिखाई नहीं दी, जहां किलनी लगी थी।

तब बहन ने कहा- पैंट नीचे खिसकाओ … किलनी दिखाई नहीं दे रही है।
पैंट नीचे खिसकाने में मैं सकुचाया.
तो उसने खुद ही अपने हाथों से मेरी पैंट खींच दी।
मैं उसके सामने पूरा नंगा हो गया।

वैसे वह मेरी बड़ी बहन थी इसलिए उसके आगे नंगा होने में कोई बुराई नहीं थी।
पर जब लड़का समझदार हो जाए तो बहन के आगे नंगा होने में शर्म तो लगती ही है।

अब तक बहन का इरादा कोई गलत नहीं था।
वह भाई प्रेम में मेरे पेल्हर की किलनी निकाल कर मुझे उस कष्ट से निजात दिलाना चाहती थी जो मुझे परेशान किए था।

तब मुझे क्या पता था कि इसी किलनी की वजह से एक दिन मुझे वह सुख मिलेगा जिसके लिए लड़के छटपटाते रहते हैं।

बहन ने मेरे पेल्हर पर टार्च का उजाला फेंका।
उसे किलनी दिख भी गई।
पर बिना कुछ पकड़े उसे वह खींच नहीं सकती थी।

चूंकि किलनी एकदम लंड के नीचे लगी थी इसलिए उसने मजबूरन मेरा लंड, तब छुन्नी थी. पकड़ा तो वह एकदम से खड़ी हो गई।
मेरी छुन्नी को खड़ी होते देख वह किलनी निकालना जैसे भूल गई और मेरी छुन्नी को हाथ में पकड़े-टकड़े ही बोली- बहन के हाथ में छुन्नी पकड़ा कर इसे खड़ी करते तूझे शर्म नहीं आई?
मैं क्या कहता!
शर्म तो मुझे भी आ रही थी।

मेरी छुन्नी भी अब उतनी छोटी नहीं थी।
इसे आराम से मुट्ठी में ले कर सहलाया जा सकता था।

मेरी बहन किलनी को भूल कर मेरी छुन्नी को मुट्ठी में दबाए देख रही थी।
शायद उसने पहली बार इस तरह छुन्नी या लंड पकड़ा था।

उसे अच्छा लगा था छुन्नी पकड़ना इसलिए वह उसे पकड़े बैठी थी।

जब मैंने देखा कि वह किलनी नहीं निकाल रही तो मैंने कहा- किलनी निकालो न दीदी, वह काट रही है।
“निकालती हूं, इतना परेशान क्यों हो रहा है?”
“काट रही है दीदी!”

उसने मेरा लंड ऊपर कर के किलनी निकाली तो जहां वह घुसी थी, वहां से एक बूंद खून निकल आया।

उसने उंगली से खून पौंछा और लंड उसी तरह पकड़े रही।
जबकि अब उसे मेरा लंड छोड़ देना चाहिए था क्योंकि किलनी तो निकल गई थी।

लंड छोड़ने के बजाय बहन मेरी आंखों में आंखें डाल कर मेरे खड़े लंड को सहलाने लगी।
उसका सहलाना मुझे अच्छा लगा।

मैं लंड छोड़ने की न कह कर चुपचाप खड़ा सहलवाता रहा।
उसके सहलाने से मुझे अजीब सी गुदगुदी हो रही थी।

तब मेरा लंड खुलता नहीं था।
खुलता क्या … मैंने कभी खोला ही नहीं था क्योंकि उसे खोलने के बारे में मुझे पता ही नहीं था।

मेरे लंड को सहलाते-सहलाते बहन ने झटका देकर उसे खोल दिया।
चूंकि लंड कभी खुला नहीं था इसलिए उसमें कचरा जमा था.
जिसके खुलते ही अजीब सी पेशाब जैसी बदबू आई।

बहन ने कहा- इसे कभी साफ नहीं करता क्या?
“इसे कैसे साफ किया जाता है, मुझे पता ही नहीं था।”

कमरे में रखी तेल की कटोरी ले कर उसने लंड के आगे वाले हिस्से में तेल लगा कर एक पुराने कपड़े से पौंछ दिया।
अब मेरा लंड साफ हो गया।

लंड साफ कर के उसने कहा- नहाते समय इसे साफ कर लिया कर!
मैंने हां में सिर हिलाया.

तो उसने कहा- अच्छा लग रहा है? तुम्हारी छुन्नी तो अब बड़ी हो गई है। इसे सहलाने में बहुत अच्छा लगता है। पर यह बात किसी से कहना मत कि मैं तुम्हारी छुन्नी सहला रही थी। तुम्हें भी अच्छा लग रहा है न? अगर तुम किसी से बताओगे नहीं तो मैं तुम्हारी छुन्नी इसी तरह सहलाती रहूंगी। मुझे भी इसे सहलाना अच्छा लग रहा है।

“ठीक है दीदी, मैं किसी से नहीं बताऊंगा।” हां में सिर हिलाते हुए मैंने कहा।

इसके बाद तो यह क्रम बन गया।
जब भी दीदी को मौका मिलता, वह मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगती।

मुझे भी उसके सहलाने में मजा आता था इसलिए मैं आराम से सहलवाता था।

इसी तरह समय बीत गया।
मेरा लंड काफी बड़ा और मोटा हो गया था। मतलब जितना बड़ा सभी का होता है, उतना बड़ा हो गया था।

मेरी बहन मेरा लंड सहलाती जरूर थी, पर उसने कभी उसे झाड़ा नहीं यानी मुट्ठ नहीं मारी।

अब मेरा भी मन उसकी चूत देखने का ही नहीं चोदने का मन होता था.
पर वह मुझसे बड़ी थी इसलिए कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं होती थी।

वह मेरा लंड खड़ा करती, सहलाती और वैसे ही छोड़ देती।
एक दिन उसने कहा- जानते हो, इसमें से पानी भी निकलता है?
“वह कैसे?” मैंने जिज्ञासा से पूछा।
“निकाल कर दिखाऊं?” बहन ने पूछा।
“हां।” मैंने कहा।

अब बहन मेरा लंड पकड़ कर ऊपर-नीचे करने लगी।
मुझे इस बार सहलाने से ज्यादा मजा आ रहा था।

मेरा लंड जब झड़ने को हुआ तो मुझे अजीब सी सिहरन होने लगी।
फिर जब लंड झड़ने को हुआ तो मैं उछलने लगा।
मेरे मुंह से सी…सी… की आवाज निकलने लगी।

उसने कहा- चुप … आवाज नहीं निकलनी चाहिए, वरना मम्मी आ जाएगी तो हम दोनों की पिटाई हो जाएगी।

यह कहते हुए भी उसका हाथ चलता ही नहीं रहा, बल्कि अब और तेजी से चलने लगा था।
आखिर मैं झड़ गया।

मेरे लंड से गीला गीला चिपचिपा सा पदार्थ निकला, जिसे दीदी ने बताया कि इसे वीर्य कहते हैं।

जब मेरा लंड झड़ गया तब मैंने हिम्मत कर के कहा- दीदी एक बात कहूं, डांटोगी तो नहीं?
“कहो, डांटूंगी क्यों?”
“मैं भी आप की वो देखना चाहता हूं।”

“क्या?” उसने मेरी आंखों में आंखें डाल कर शरारत से मुसकराते हुए पूछा।
शायद वह समझ गई कि भाई अब चोदने लायक हो गया है और उसकी चूत चोदना चाहता है।
“आप की वो!”

“यह वो क्या है? मेरे पास तो कोई वो नहीं है।”
दीदी शायद मेरे लंड का पानी देख कर मस्त हो गई थी और वह भी लंड का मजा चूत के अंदर लेकर लेना चाहती थी।

इसलिए अब उसे भी शरारत सूझ रही थी और वह मुझे पूरी तरह खोलना चाहती थी। इसलिए वह इस तरह की बात कर रही थी।

उसने उसी लहजे में कहा- जो देखना है, उसका नाम लेकर बता!
मैं सकुचा रहा था चूत कहने में!

थोड़ी देर मैं कुछ नहीं बोला तो वही बोली- बोल … बोल … शरमा मत। तू जो कहेगा, मैं वह दिखाऊंगी।
बहन के इतना कहते ही मुझमें हिम्मत आ गई।

मैंने कहा- मैं आपकी बुर (चूत) देखना चाहता हूं।

“बहुत दिन लगा दिए यह कहने में? मैं तुझे बहुत पहले ही अपनी बुर दिखाना चाहती थी, पर तूने कभी कहा ही नहीं। अब आज कहा है तो भला क्यों नहीं दिखाऊंगी। ले देख ले खुद ही खोल कर!”

मैंने झट बहन का पायजामा नीचे खिसका दिया।
उसकी चूत सहित गांड खुल गई।

दीदी गोरी थी इसलिए उसकी चूत भी चमक रही थी और चूतड़ भी।
पर चूत पर बाल थे इसलिए स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही थी।

उसकी चूत बालों से ढकी थी।
फिर भी बीच वाला हिस्सा तो दिखाई ही दे रहा था।

मैंने पहली बार चूत देखी थी।
बहन की चूत देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था।
जबकि थोड़ी देर पहले ही बहन ने मुट्ठ मार कर उसका पानी निकाला था।

मैं बहन की चूत देख रहा था तो उसकी नजर मेरे लंड पर थी।
उसके खड़े होते ही वह बोली- चूत देखते ही इसका चोदने का मन हो गया।

चोदने की कौन कहे … मैं तो पहली बार चूत देख रहा था।
मन में लड्डू भी फूट रहे थे कि शायद दीदी चोदवा ले।
पर कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी।
बस सारा भरोसा दीदी पर था।

मैं कुछ इसलिए नहीं कह पा रहा था कि कहीं बहन गुस्सा हो गई तो जो मिल रहा है, वह भी मिलना बंद हो जाएगा।

पर भाग्यशाली था मैं!

मेरे खड़े लंड को हाथ में लेकर उसने कहा- बेचारा चूत में घुसने के लिए बेताब हो रहा है।

फिर उसे सहलाते हुए आगे बोली- निराश होने की जरूरत नहीं है बच्चा, तुझे मिलेगी चूत, जरूर मिलेगी चूत!
मैं खुश हो गया।

पर मैंने कभी किसी को चोदा तो था नहीं … इसलिए मन ही मन परेशान था कि अगर दीदी ने चोदवाया भी तो मैं चोदूंगा कैसे?
क्योंकि मैं तो यह भी नहीं जानता था कि चूत में लंड कहां और कैसे घुसेड़ा जाता है।

मैं भले अनाड़ी था … पर दीदी को सब पता था।

यह बात मुझे तब पता चली जब उसने कहा- तुम्हारा लंड बता रहा है कि तुम मुझे चोदना चाहते हो? सचमुच तुम्हारा मन मुझे चोदने का है?

दीदी सब कुछ खुल कर कह रही थी।
उसे कुछ भी कहने में जरा भी शर्म नहीं लग रही थी।

जबकि मैं शर्म, संकोच और डर की वजह से कुछ भी नहीं बोल पा रहा था।

जब उसने पूछा कि क्या मेरा उसे चोदने का है तो मैंने हां में सिर हिला दिया।

तब वह मेरे लंड को मुट्ठी में जोर से दबा कर बोली- साले, तूने मुंह में दही जमा रखी है क्या? इतना बड़ा सिर हिला रहा है। मुंह से बोल कि तेरा मन क्या कह रहा है?
मैंने नजरे झुका कर कहा- हां।

“क्या हां? आगे भी कुछ कहेगा?
“हां, मेरा मन है।” मैंने कहा।

“किस चीज के लिए मन है?” बहन इस तरह के सवाल कर के मेरे अंदर जो झिझक, शर्म थी, शायद उसे दूर करना चाहती थी।

उसने आगे कहा- बोल किस चीज का मन है?
मैं कुछ नहीं बोला.

तो Xxx सिस ने कहा- बोल साले … नहीं तो अपनी चूत तेरे मुंह में रगड़ दूंगी।
मैंने धीरे से कहा- चोदने का!

“ये हुई न बात … साले माल भी खाना चाहता है और मुंह भी छुपाना चाहता है। चोदना तो चाहता है पर पता भी है कैसे चुदाई की जाती है?
“जब कभी किया ही नहीं तो कैसे पता होगा।” मैंने कहा।

“क्या नहीं किया?”
“अरे वही!”
“अरे वही क्या? कहा न कि खुल कर बात करेगा बच्चे तभी चोदने में मजा आएगा।”
“चुदाई भई!” अब मैं खुलने लगा।
“यह हुई न बात … अब इसी तरह बात करना!”

फिर उसने चूत पर हाथ रख कहा- इसे क्या कहते हैं?
मैंने झट कहा- बुर (चूत)
हमारे यहां चूत को बुर ही कहा जाता है।

“इधर देख!” उसने चूत को बीच से फैला कर यानि दोनों फांकों को अलग-अलग करते हुए कहा- इसमें नीचे एक छेद है न, इसी में तुम्हें अपना लंड घुसेड़ना है।” समझ गया न?
“जी समझ गया।”

“तो फिर चल … अब चुदाई का कार्यक्रम शुरु करते हैं।”

इसके बाद पोर्न सिस ने मेरे दोनों हाथ पर रखते हुए कहा- इन्हें धीरे-धीरे दबाते हुए मसल! ज्यादा जोर से मत दबाना, वरना दर्द होगा।

मैं दीदी की चूचियां दोनों हाथ में लेकर दबाते हुए मसलने लगा तो उसने अपने मुंह में मेरे होंठ लेकर चूसना शुरू कर दिया।
अब तो मेरा लंड फनफना उठा।

एक हाथ से मेरे लंड को टटोलते हुए उसने कहा- यह तो साला पूरा डंडे की तरह हो गया है रे! लगता है साली चूत को फाड़ ही डालेगा। आज पहली बार चूत में लंड घुसेगा। संभाल कर धीर-धीरे घुसेड़ना। कहीं फट गई तो परेशानी हो जाएगी।

वह आगे बोली- अच्छा एक काम कर … पहले तू मेरी चूत को गीली कर … इसके लिए तुझे मेरी चूत को चाटना होगा। गीली हो जाएगी तो लंड आराम से घुस जाएगा। चल चाट!
इतना कह कर बहन टांगें फैला कर लेट गई।

मुझे दोनों टांगों के बीच बैठा कर चूत चाटने का इशारा किया।
मैं तुरंत झुक कर उसकी चूत चाटने लगा।

उसने मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- चूत चाटते हुए खूब थूक छोड़!
मैं थूक निकाल कर उसकी चूत चाट रहा था।

मेरी बहन जल्दी ही गर्म हो गई … चूतड़ उछाल उछाल कर कह रही थी- बहुत अच्छा लग रहा है। और जोर जोर से चाट!
वह मुझे उकसा उकसा कर चूत चटवा रही थी।

उसकी चूत के ऊपर से थूक बहने लगा था।
फिर एक झटके से उठी और मुझे गिरा कर मेरे ऊपर चढ़ गई।

मेरे लंड को मुंह में लेकर खूब थूक लगाया, फिर मेरे लंड कर बैठ कर लंड को छेद पर लगा कर बोली- मैं ऊपर से जोर लगा रही हूं और तू नीचे से लगा। अब लंड को धीरे धीरे चूत के अंदर लेना है।

चूत भी गीली थी और लंड भी।

मेरा लंड बहुत मोटा नहीं था इसलिए आराम से चूत में घुस गया।
वह न चिल्लाई और न ही रोई।

लंड चूत में घुसा तो ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मुट्ठी में पकड़ रखा है।
ऐसा इसलिए था क्योंकि बहन की चूत में उस दिन पहली बार लंड घुस रहा था।
इसके पहले उसने कभी अंगुली तक नहीं डाली थी।

लंड चूत में घुसा तो मुझे स्वर्गिक सुख मिला।
चूत में लंड के घुसते ही दीदी ने मुझे दोनों बांहों से जकड़ कर चिपका लिया और अपने मुंह में मेरे होंठों को चूसने लगी।

थोड़ा चूसने के बाद बोली- तू भी मेरे होंठों को इसी तरह चूस!

फिर उसने मुझे छोड़ कर कहा- मेरी चूचियों को मसलते हुए दबा!
मैंने बहन की चूचियां दबाई तो उसके मुंह से सिसकारी निकल गई।
उसने कहा- आराम से दबा … ये मजा लेने के लिए हैं, तकलीफ देने के लिए नहीं!

इतना कह कर उसने मुझे चूमते हुए कहा- अब चोद मुझे! लंड डाल कर ही न पड़ा रह। चोदेगा, तभी मजा मिलेगा।

मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगा।
ऐसा करने से सचमुच बहुत अच्छा लग रहा था।

ऐसा करने से थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गए।

झड़ते ही मैं लस्त होकर दीदी के ऊपर लेट गया तो उसने मुझे चिपका लिया।

इसके बाद तो हम दोनों को जब भी मौका मिलता, दोनों ही चुदाई कर लेते।

जब तक बहन की शादी नहीं हो गई, उसने मुझे कभी चूत के लिए तरसने नहीं दिया।

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