मेरी साली जो मुझे पागल कर देगी

मेरा नाम अर्जुन है। मैं दिल्ली में रहता हूँ, और मेरी शादी शीतल से हुई थी। शीतल खूबसूरत थी, लेकिन उसकी छोटी बहन, नेहा—उफ्फ! वो तो आग का गोला थी। नेहा मेरी साली थी, और पहली बार जब मैंने उसे देखा, मेरा दिल धक-धक कर उठा। लंबे काले बाल, गोरी चमड़ी, और वो चूचियाँ जो ब्लाउज में कैद होने को तैयार नहीं थीं। उसकी गोल मटोल गांड हर कदम पर मटकती थी, और होंठ ऐसे रसीले कि बस चूसने का मन करे। मैंने सोचा, “ये लड़की तो मुझे पागल कर देगी।”

पहली मुलाकात शादी के बाद हुई। नेहा अपने मायके से हमारे घर आई थी। वो टाइट जींस और टॉप में थी, जिसमें उसकी चूचियाँ उभरी हुई थीं। उसने मुझे देखकर मुस्कुराया और बोली, “जीजाजी, आप तो बड़े हैंडसम हैं। दीदी ने तो लॉटरी जीत ली।” उसकी आवाज में एक चुलबुलापन था, और उसकी नजरें मेरे जिस्म पर घूम रही थीं। मैंने मजाक में कहा, “नेहा, तू भी कम नहीं है। कोई लड़का तेरे लिए पागल न हो तो बताना।” वो हँसी और बोली, “जीजाजी, अभी तक तो कोई ऐसा मिला नहीं, शायद आप ही कुछ कर दो।” उसकी ये बात मेरे दिल में चिंगारी सी जला गई।

रसोई का जलवा

एक दिन शीतल माँ के साथ बाजार गई थी, और घर में सिर्फ मैं और नेहा थे। वो रसोई में चाय बना रही थी। उसने छोटा सा टॉप और शॉर्ट्स पहने थे, जिसमें उसकी नंगी टाँगें और मोटी गांड साफ दिख रही थी। मैं रसोई में गया और बोला, “नेहा, चाय में शक्कर कम डालना, वरना तू ही काफी मीठी है।” वो पलटी, और उसकी चूचियाँ टॉप में हिलीं। वो मेरे करीब आई और बोली, “जीजाजी, आपको मिठास चाहिए तो चाय छोड़ो, कुछ और ट्राई करो।”

उसकी आँखों में शरारत थी। मैंने कहा, “क्या ट्राई करूँ, साली साहिबा?” वो हँसी और अपने होंठों को जीभ से चाटते हुए बोली, “जो मन करे, जीजाजी।” उसकी वो हरकत देखकर मेरी साँसें गर्म हो गईं। मैंने पास जाकर कहा, “नेहा, तू ऐसी बातें करेगी तो मैं सच में पागल हो जाऊँगा।” वो मेरे सीने पर उंगली फेरते हुए बोली, “तो हो जाओ न, जीजाजी। मुझे पागल मर्द ही पसंद हैं।” उसकी गर्म साँसें मेरे चेहरे पर पड़ीं, और मेरे जिस्म में आग सी लग गई।

बारिश का बहाना

एक दिन बारिश हो रही थी। शीतल ऑफिस गई थी, और मैं घर पर था। नेहा बाहर से भीगकर आई। उसका टॉप पानी से चिपक गया था, और उसकी चूचियाँ साफ नजर आ रही थीं। उसकी शॉर्ट्स भीगकर उसकी चूत के उभार को उभार रही थी। वो मेरे पास आई और बोली, “जीजाजी, मुझे ठंड लग रही है। कुछ करो न।” मैंने तौलिया लिया और उसके बाल सुखाने लगा। मेरे हाथ उसकी गर्दन से नीचे सरके, और वो सिहर उठी।

“नेहा, तू तो पूरी भीग गई है,” मैंने कहा। वो मेरे करीब सरकी और बोली, “तो मुझे गर्म कर दो, जीजाजी।” उसकी आँखें मेरे होंठों पर टिकी थीं। मैंने उसके गीले होंठों को देखा और कहा, “तेरे ये होंठ तो मुझे मार डालेंगे।” वो हँसी और मेरे सीने से चिपक गई। उसकी चूचियाँ मेरे जिस्म से दब गईं, और उसकी गर्मी मुझे महसूस हुई। मैंने उसके कानों में फुसफुसाया, “नेहा, तू सच में आग है।” वो बोली, “तो इस आग में जल जाओ, जीजाजी।” उस पल में मेरे हाथ उसकी गांड पर चले गए, और वो हल्के से सिसकी।

रात का खेल

एक रात शीतल जल्दी सो गई। नेहा और मैं टीवी देख रहे थे। वो मेरे पास सोफे पर बैठी थी, और उसकी टाँगें मेरी टाँगों को छू रही थीं। उसने टाइट टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें उसकी चूचियाँ उभरी हुई थीं। वो बोली, “जीजाजी, आपको नींद नहीं आ रही?” मैंने कहा, “तेरे पास बैठकर नींद कैसे आएगी, नेहा?” वो हँसी और मेरे कंधे पर सिर रखकर बोली, “तो जागते रहो, मेरे साथ।”

उसकी साँसें मेरे गले को छू रही थीं। मैंने कहा, “नेहा, तू इतने करीब आएगी तो मैं काबू नहीं रख पाऊँगा।” वो मेरे कान के पास आई और बोली, “तो काबू छोड़ दो, जीजाजी। मेरी चूत तो आपके लिए तरस रही है।” उसकी ये बात सुनकर मेरे जिस्म में बिजली दौड़ गई। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से छुआ, और वो पागलों की तरह मुझे चूमने लगी। उसकी चूचियाँ मेरे सीने से दब रही थीं, और मेरे हाथ उसकी गांड को मसल रहे थे। वो सिसकते हुए बोली, “जीजाजी, मुझे चोद दो, मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती।” मैंने उसे सोफे पर लिटाया, और उस रात हम दोनों एक-दूसरे में खो गए।

सुबह की शरारत

अगली सुबह नेहा रसोई में थी। वो शॉर्ट नाइटी में थी, जिसमें उसकी गांड मटक रही थी। मैं पीछे से गया और उसकी कमर पकड़ ली। वो हँसी और बोली, “जीजाजी, रात को मन नहीं भरा?” मैंने उसके कानों में कहा, “तेरी चूत और चूचियाँ देखकर मन कभी भरेगा, नेहा?” वो पलटी और मेरे होंठों को चूमते हुए बोली, “तो आज फिर चुदाई करो, जीजाजी।” उसकी वो बेशरमी मुझे पागल कर रही थी। मैंने उसे गोद में उठाया और कमरे में ले गया। उस दिन हमने फिर वही आग जलाई।

नेहा मेरी साली थी, लेकिन वो मेरे लिए एक जुनून बन गई। उसकी चूचियाँ, उसकी गांड, उसकी चूत—हर चीज मुझे अपनी ओर खींचती थी। हमारा रिश्ता एक खतरनाक खेल था, लेकिन उसकी वो कामुक अदा और चुदाई की चाहत मुझे रोक नहीं पाई। वो सच में मुझे पागल कर देती थी, और मैं उसकी आग में जलने को तैयार था।

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